क्या आप भी परेशानियों से जूझ रहे हैं?

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समय बीतता जा रहा है, पर परेशानियों का दौर खत्म नहीं हो रहा। क्या आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है? तो चिंतित ना होइये क्योंकि आप इस मार्ग में अकेले नहीं है।

प्रत्येक व्यक्ति की अपनी एक अलग ही परेशानी है। कोई व्यक्ति अपनी नौकरी को लेकर परेशान है तो कोई नौकरी नहीं होने की वजह से परेशान है।

कोई व्यक्ति अपने दुख से दुखी है तो कोई व्यक्ति पड़ोसी के सुख से दुखी है। कोई शारीरिक रूप से दुखी है तो कोई मानसिक रूप से दुखी है।

जितना टेक्नोलॉजी का विस्तार बढ़ता जा रहा है, उतना ही परेशानियों का अंबार बढ़ता जा रहा है। पुराने समय में लोग इतने दुखी नहीं थे, जितने कि आज इस जमाने में है। जितने तनाव और अवसाद ग्रस्त लोग आज इस समय में है शायद ही पुराने समय में इतनी भयंकर बीमारियां थी। जहां प्राचीन समय में लोगों के पास सुख और शांति थी। वही आज इस आधुनिक काल में उतनी ही दुख और अशांति है, चाहे लोगों के पास कितना भी पैसा हो या ना हो। दुख अलग-अलग रूपों में हर व्यक्ति के पास है।

प्रत्येक व्यक्ति को लगता है कि मेरा पड़ोसी या मेरा दोस्त सुखी हैं और मुझे भी यही लगता है। मुझे आंखों की बीमारी है, कभी-कभी मेरी आंखें बहुत दर्द करती हैं और जलन करती हैं जिससे कि मैं बहुत परेशान हो जाता हूं तब उस वक्त मुझे लगता है कि और मेरे दोस्त अपनी आंखों से कितने सुखी हैं उन्हें कोई परेशानी नहीं है उन्हें कोई दर्द नहीं है वह खुश हैं पर यह गलत है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अलग अलग बीमारियों से जूझ रहा है कोई शारीरिक रूप से परेशान है तो कोई व्यक्ति मानसिक रूप से।

शारीरिक रूप से किसी व्यक्ति के सुनने की बीमारी हो सकती है, तो किसी के सर दर्द की, किसी के दाद खाज खुजली की तो, किसी के बदन दर्द की, किसी के हकलाने की तो, किसी के चलने की, किसी के मोटापे की तो, किसी के पतले पनकी, किसी की लंबाई अधिक है तो कोई बौना है, किसी के आंखों की प्रॉब्लम है तो, किसी के एलर्जी की। ऐसी कई सारी बीमारियां है भगवान ने प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग बीमारियां दी है।

मानसिक रूप से कोई व्यक्ति तनावग्रस्त और अवसाद ग्रस्त हो सकता है। इसकी कई सारी वजह हो सकती हैं बिजनेस में घाटा होना, नौकरी में बॉस की फटकार, माता-पिता का बीमार होना, शादी की चिंता होना, बच्चे नहीं होना और भी कई सारी पारिवारिक और व्यावसायिक परेशानियां हो सकती है।

आपकी परेशानी भी इन्हीं परेशानियों में से एक हो सकती है या फिर कुछ अलग भी हो सकती हैं।

बुरा वक्त और परेशानियां हर व्यक्ति की जिंदगी में आते हैं। कुछ व्यक्ति अपनी परेशानियों के साथ समझौता कर लेते हैं तो कुछ अपनी परेशानियों से संघर्ष करते हैं।तरीके दोनों ही सही है, चाहे संघर्ष करें या समझौता क्योंकि यह व्यक्ति की परिस्थिति तय करती हैं कि उसे क्या करना है।

कहते हैं बुरा वक़्त सबका आता हैं, कोई निखर जाता हैं, कोई बिखर जाता हैं |

तात्पर्य यही है कि बुरा वक्त हमेशा एक निश्चित अवधि के लिए आता है। यह हमेशा आपके अच्छा समय आने का एक सूचक होता है। इस समय के दौरान आपको केवल अपना हौसला बुलंद रखने की आवश्यकता होती है। यह बुरा वक्त भी निकल जाता है जैसे किसी अंधेरी रात के बाद एक नई सुबह का होना।

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