जिंदगी में खुश रहना क्यों जरूरी है?

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समय एक बहती नदी की तरह है बचपन से जवानी और जवानी से बुढ़ापा कब आ जाता है पता ही नहीं चलता। जिंदगी में चाहे आप इस नदी में गोते लगाओ या ना लगाओ यह एक बहती नदी की तरह चलती रहती है। जिंदगी चाहे दुखी होकर बीते या फिर खुश होकर यह हमारे हाथ में है। हमेशा यही सोच कर खुश होना चाहिए कि अगला क्षण हम रहे या ना रहे इस पल में जरूर खुश रहे।

जिंदगी में सुख और दुख हमें बराबर मात्रा में मिलते हैं परंतु हमें सुख की अवधि कम और दुख की अवधि बहुत ज्यादा लगती है क्योंकि अच्छा समय बहुत जल्दी निकल जाता है और बुरा वक्त हमें दुख देता है और हमें लगता है कि यह बड़ी कठिनाई से निकल रहा है।

जिंदगी के साथ हमारे खुश रहने की भी कई शर्ते होती हैं जैसे मुझे अगर यह नौकरी मिल जाए तो मैं खुश रहूंगा, मैं शादी कर लूं तो मैं खुश रहूंगा, मेरे बच्चे हो जाए तो मैं खुश रहूंगा, मुझे अच्छा दोस्त मिल जाए तो मैं खुश रहूंगा, मुझे अच्छा बॉस मिल जाए तो मैं खुश रहूंगा, मेरी यह बीमारी ठीक हो जाए तो मैं खुश रहूंगा, मैं अगर अमीर हो जाऊं तो मैं खुश रहूंगा और भी ऐसी ही कई सारी शर्ते हैं जो हम जिंदगी के सामने रखते हैं कभी कभी तो कोई शर्त पूरी हो जाती है पर बहुत सारी शर्तें पूरी नहीं होती हैं तब हम निराश हो जाते हैं और यह सोचकर दुखी होते हैं कि मेरे जीवन में तो दुख ही हैं।

जिंदगी में किसी एक ही चीज को अपने जीवन का आधार नहीं बनाना चाहिए कि उसके बिना हम खुश ना रह पाए। जिंदगी बहुत लंबी है और इसमें हम बहुत कुछ कर सकते हैं केवल जरूरत है तो हौसला बुलंद रखने और सकारात्मक सोच के साथ जीवन जीने की।

जिंदगी में दुखी रहने के सौ कारण हो सकते हैं पर खुश रहने के लिए एक ही कारण काफी होता है जो व्यक्ति खुद खुश रहना जानता हो वही व्यक्ति अन्य लोगों को भी खुश रखने का तरीका जानता है।

जिंदगी में दुख अलग-अलग रूपों में हर व्यक्ति को मिलता है यह परेशानियां व्यावसायिक, पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी हो सकती हैं और हम इन परेशानियों से भाग नहीं सकते हैं इस परेशानियों के दौर में हम दुखी हो सकते हैं तनाव और अवसाद ग्रस्त हो सकते हैं और अगर हम चाहें तो इन परेशानियों के साथ खुशी खुशी समझौता भी कर सकते हैं।

क्या आपको लगता है कि सुख और दुख हमारे इस वातावरण में हैं जो जब चाहे आ जाते हैं। दरअसल ऐसा नहीं है। सुख और दुख दोनों हमारे दिमाग में है हम चाहें तो एक ही क्षण में हम खुश हो सकते हैं और अगले ही क्षण दुःखी हो सकते हैं। हमारे जीवन में सुख और दुख का निर्णय हमारे विचार करते हैं। हम हमारे विचारों से ही दुखी होते हैं। केवल आप एक ही क्षण में अपने विचारों को बदल कर खुश हो सकते हैं।

आज जिंदगी एक वीडियो गेम की तरह हो गई है जिसका लेवल कठिन से कठिन होता ही जा रहा है। आज आप अगर अपनी जिंदगी में पीछे मुड़कर देखें तो आप देखेंगे कि आपने कितने ही दुख और बुरे वक्त के पहाड़ों को पीछे छोड़ दिया है और अभी कितने ही दुख के पहाड़ों पर चढ़ाई करना बाकी है। अपनी जिंदगी के सबसे बुरे वक्त को याद कीजिए कि अगर वह वक्त भी ना रहा तो यह वक्त भी ना रहेगा और इसी सोच के साथ अपनी जिंदगी को खुशनुमा बनाइये।

अपने दिमाग में हम अच्छे और सकारात्मक विचारों को जगह देखकर हम अपनी जिंदगी को खुशनुमा बना सकते हैं जिंदगी दुखी होकर बीते या खुश होकर। यह तो बीत जायेगी इसलिए अच्छा है कि क्यों ना इस पल को खुशी से जीयें।

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