कैसे मिलता है किसी कार्य का वास्तविक फल? (How to get desired results in life)

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इस दुनिया में हम जिस भी चीज के पीछे भागते हैं वह चीज हमें उतना ही ज्यादा भगाती है। मान लीजिए कि आप अपने बिजनेस में दिन रात मेहनत कर रहे हैं लेकिन आपको उसका कोई परिणाम नहीं मिल रहा है या फिर परिणाम बहुत धीरे या बहुत कम मिल रहा है। आप अपने लक्ष्य के पीछे भाग रहे हैं लेकिन लक्ष्य तो आप से दूर जाता ही जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में कभी-कभी मनोबल या हौंसला भी टूटता है, और हम दुविधा में पड़ जाते हैं कि हमें इस कार्य को करना चाहिए या फिर इसे छोड़ देना चाहिए।

यही वह समय होता है जब तय हो जाता है कि वह व्यक्ति सफल होगा या असफल। इन मुश्किल परिस्थितियों में भी जो लोग संयम रखते हैं और अपने काम को धीरे धीरे आगे बढ़ाते रहते हैं उनका सफल होना तय हो जाता है और जो व्यक्ति इन मुश्किल परिस्थितियों में टूट जाते हैं और अपने आप को कमजोर समझते हैं और सोचते हैं कि वह यह नहीं कर पाएंगे तब उनका असफल होना तय हो जाता है। अब बात यह आती है कि हम उन मुश्किल परिस्थितियों में कैसे डटे रहे? कैसे अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें? ताकि हम सफल हो जाए।

इसका जवाब बहुत आसान है कि आपको अपने कार्य से कोई आशा नहीं रखनी चाहिए। जी हां यह बहुत मुश्किल होता है कि कार्य से कोई आशा ना रहे, लेकिन हमें यह करना होगा। जब किसी व्यक्ति को अपने कार्य से कोई आशा नहीं रहती है तब वह उसके परिणाम की चिंता नहीं करता, चाहे उसका परिणाम अच्छा है या फिर बुरा वह सिर्फ अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर केंद्रित रखता है।

भगवान कृष्ण भगवत गीता में कहते हैं

“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥”

श्री कृष्ण कहते हैं कि फल की चिंता मत करो अर्थात परिणाम की चिंता को ईश्वर पर छोड़ दो। आप बस अपना कार्य करो और परिणाम की चिंता भगवान पर छोड़ दो।

जो व्यक्ति इस प्रकार से कार्य करता है उसका सफल होना तय है जो मुश्किल परिस्थितियों में भी संयम रखता है और अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है उसका सफल हो जाना तय है।

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