skip to Main Content
नौकरी से नाखुश लोगों के लिए खुशखबरी।।

नौकरी से नाखुश लोगों के लिए खुशखबरी।।

आज से लगभग दो दशक के अंदर लोगों की जीवनशैली में जो बदलाव आया है उतना बदलाव शायद दो शताब्दी में भी नहीं आया होगा। जिंदगी की भागदौड़ इतनी तेज हो चुकी है कि ना किसी को खाने का समय है ना किसी को सेहत की परवाह है और ना ही किसी के पास परिवार के लिए समय है। सब लोगों का केवल एक ही लक्ष्य है कि पैसा कमाना। कैसे भी?

आज से लगभग दो दशक पहले लोगों की जिंदगी जितनी खुशहाल थी आज उसका उतना ही उल्टा हो गया है। क्योंकि उन लोगों के पास भले ही पैसा नहीं था लेकिन वह संतुष्ट थे। लोग दिन रात खेती करते थे मेहनत करते थे और उससे जो भी कमाई होती थी उससे अपने घर परिवार का गुजारा करते थे। उस वक्त लोगों की सुख सुविधाएं सीमित थी और उन्हें ज्यादा की चाह नहीं थी। उनका केवल एक ही मकसद था अपने घर परिवार की खुशहाली और संतुष्टि। आज भी लोगों का मकसद उनके घर परिवार की खुशहाली और संतुष्टि ही है लेकिन मायने बदल गए हैं सोचने का नजरिया बदल गया है कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह बढ़ गई है सुख सुविधाओं की ज्यादा चाह बढ़ गई है पड़ोसी से ज्यादा पैसा होना चाहिए ज्यादा सुख सुविधाएं होनी चाहिए हर कोई अपने आप को एक ऐसे लेवल पर ले जाना चाहता है जहां कोई और पहुंच ना सके।

आज से दो दशक पहले लोग अपने घर परिवार के साथ शांति और सुकून से खाना खाते थे लेकिन आज के जमाने में लोगों को खाना खाने की फुर्सत तक नहीं है बहुत सारे लोग फास्ट फूड पर अपनी जिंदगी निकाल रहे हैं जिसकी वजह से उनका स्वास्थ्य गड़बड़ा गया है कई तरह की बीमारियां उन्हें जकड़ रही है परंतु इन सारी चीजों को इग्नोर करते हुए व्यक्ति पैसे की ओर भाग रहा है। आज के दौर में व्यक्ति का शांति और सुकून पैसा ही है और यही हकीकत है।

गांव और शहर के प्राकृतिक वातावरण में भी बहुत अंतर है जहां गांव में शुद्ध हवा सांस लेने को मिलती है वहीं शहर में हर जगह प्रदूषण ही फैला हुआ है। धुंए और प्रदूषण के कारण लोगों का स्वास्थ्य बहुत प्रभावित हो रहा है कई प्रकार की बीमारियां उन्हें जकड़ रही है। फिर भी लोगों का गांव से शहरों की तरफ प्रवास दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है।

आज के इस समय में व्यक्ति पैसा कमाने के लिए दिन-रात सोचता है आगे की रणनीति बनाता है कल क्या करना है उसकी रणनीति बनाता है। ज्यादा सोचने की वजह से वह चैन से नींद तक नहीं निकाल पाता है जिसका प्रतिकूल प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर पड़ता है। दो दशक पहले लोगों के पास नौकरियां नहीं थी पैसा नहीं था लेकिन खुशहाली और संतुष्टि थी। वही आज इसका उल्टा है लोगों के पास नौकरी है, पैसा है पर खुशहाली और संतुष्टि नहीं है। उसे दिन रात और कमाने की चाह बढ़ गई है। जो कि आज के इस समय में बेहद जरूरी भी है।

आज की युवा पीढ़ी अपने करियर को लेकर बहुत भ्रमित है कुछ लोगों को नौकरी नहीं मिल पाती हैं तो कुछ लोग अपनी नौकरी को लेकर परेशान हैं हम उन लोगों की बात करते हैं जिनके पास नौकरी है, नौकरी भी है परंतु संतुष्टि नहीं है वह अपने जॉब से संतुष्ट नहीं है कुछ नया करना चाहते हैं कुछ अलग करना चाहते हैं या अपना खुद का बिजनेस बनाना चाहते हैं जिसके मालिक वे स्वयं हो वह जो भी करें अपनी मर्जी से करें किसी का भी उस पर दबाव ना हो। लेकिन कई सारी वजह है जिसकी वजह से वह अपना मनचाहा काम नहीं कर पाते है या उसे दबाव में रहकर नौकरी को करना पड़ता है। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं घर परिवार से लेकर स्वास्थ्य तक कई ऐसी वजह हो सकती हैं जिसकी वजह से उन्हें नौकरी करना पड़ता है।

कई लोग अपना मनचाहा कारोबार इसलिए शुरू नहीं कर पाते हैं क्योंकि वह सोचते हैं कि लोग क्या सोचेंगे। अपने काम को अपने ही मन में छोटा या बड़ा समझ लेते हैं और सोचते हैं कि समाज के लोग क्या कहेंगे कि मैं यह काम कर रहा हूं। अपनी महत्वाकांक्षा से परे वे लोगों की परवाह करते हैं। अच्छा काम करेंगे तब भी लोग कुछ कहेंगे और बुरा काम करेंगे तब भी लोग कुछ कहेंगे लोगों का तो काम ही है कहना।

Moral of the Post- काम छोटा हो या बड़ा आप जो भी करना चाहते हैं अगर आप इस में विश्वास करते हैं तो आज से ही इसकी शुरुआत करें। जिंदगी में बिना रिस्क लिए आज तक कोई भी व्यक्ति आगे नहीं बढ़ा है। गिरेंगे तभी संभलेंगे।

मुझे आशा है कि इस पोस्ट से आपका मनोबल अवश्य बढ़ेगा और आप अपनी जिंदगी में तरक्की करेंगे आपको यह पोस्ट कैसी लगती है इसे हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर अवश्य बताएं।

Advertisements

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back To Top