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बैंक का चेक: बेहद प्रेरक कहानी

बैंक का चेक: बेहद प्रेरक कहानी

“मिस्टर प्राण एक सफल व्यापारी हैं। दुर्भाग्यवश वह बीमार हो गए और कई महीनों तक बिस्तर पर पड़े रहे। उनकी अनुपस्थिति में उनके व्यापार को भारी हानि उठानी पड़ी और कर्ज़दार हो गए। बीमारी से ठीक हो जाने के बाद उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा।

उधारदाता और लेनदार उन्हें परेशान करने लगे। समस्या का कोई समाधान मिल नहीं रहा था। कर्ज़ के बोझ तले दबे-दबे दीवालियापन की नौबत आ गई। बीमारी के कारण उनका शरीर भी कमज़ोर हो गया जिसके कारण वह अधिक परिश्रम करने में भी असमर्थ थे। उन्हें वित्तीय सहायता की तुरंत आवश्यकता थी। ऐसा न हो पाने पर वह तनाव से ग्रस्त रहने लगे।

जब कोई व्यक्ति तनाव में जीता है तो अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। मिस्टर प्राण भी इसी अवस्था में डगमगाते कदमों से अपने कार्यालय जा रहे थे। चलते चलते अचानक एक व्यक्ति से टकरा गए। जिस व्यक्ति से उनकी टक्कर हुई वह एक सभ्य व सुशिक्षित व्यक्ति प्रतीत होता था। सुंदर वेशभूषा और गले में लटकती टाई से वह एक भला बिज़नेसमैन लग रहा था। टक्कर लगने के कारण जब मिस्टर प्राण ज़मीन पर गिरे तो उस व्यक्ति ने प्राण की सहायता की।

प्राण अपने पूरे होश में न होने के कारण उस व्यक्ति का मन से धन्यवाद किए बिना आगे बढ़ गए। उस व्यक्ति ने प्राण को पुकारा और उनका हाल-चाल पूछने लगा। एक अनजान व्यक्ति द्वारा संवेदना दर्शाए जाने पर मिस्टर प्राण भावुक हो गए। भावुक होकर प्राण ने अपनी सारी व्यथा कथा उस अनजान व्यक्ति को सुना दी। उस व्यक्ति ने प्राण की व्यथा न केवल शांतिपूर्वक सुनी बल्कि उनको वित्तीय सहायता देने को भी तैयार हो गया।
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उसकी एक ही शर्त थी कि प्राण को उसका धन एक वर्ष की अवधि में लौटना होगा। मिस्टर प्राण को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। यह कोई साधारण पुरुष नहीं बल्कि कोई देवता था जिसे भगवान ने उनकी मदद करने के लिए भेजा था। उन्हें लगा, हो न हो यह व्यक्ति मज़ाक़ कर रहा है। इसी बीच उस व्यक्ति ने अपनी चैकबुक निकाली, उनका नाम पूछा और एक भारी भरकम रकम का चैक काट कर उनके हाथ में थमा दिया। तत्पश्चात वह व्यक्ति वहाँ से चला गया।

मिस्टर प्राण कभी चैक को देखते कभी उस पर लिखी हुई राशि को। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि कोई अनजान व्यक्ति इतनी बड़ी राशि का चैक उन्हें दे गया है। इतनी अधिक राशि से तो उनके सारे संकट दूर हो जाएँगे। सारी क़र्ज़दारी दूर हो जाएगी, सब लेनदारों का भुगतान करने के पश्चात् भी उनके पास काफ़ी धन बच जाएगा। यह व्यक्ति वास्तव में कोई भगवान का दूत ही था। धन्यवाद करने से पहले ही वह व्यक्ति वहाँ से जा चुका था।

प्राण उसका नाम, पता, और फ़ोन नम्बर भी नहीं पूछ पाए थे। जो भी हो प्राण को उसकी सारी समस्याओं का हल मिल गया था। चैक की धन राशि ने उनमे नए प्राण फूंक दिए। उनका खोया हुआ विश्वास पुन: प्राप्त हो गया था। वह जानते था कि अब सब-कुछ ठीक हो जाएगा। अब वह जी-जान से अपने कार्य में व्यस्त हो गया। उसने बैंक से चैक का भुगतान प्राप्त नहीं किया और उस चैक को कठिन समय में प्रयोग करने के विचार से सम्भाल कर अलग रख दिया। उसने अपने बिगड़े हुए व्यापार को सम्भालने का कार्य आरम्भ कर दिया। उसे विश्वास था कि उसके पास एक बहुत बड़ी राशि का चैक है और मुसीबत पड़ने पर चैक के धन से वह हर मुसीबत का सामना करने में अब पूर्णतया सक्षम है।

वह एक कुशल व्यापारी तो था ही उसने नए सम्पर्क स्थापित किए, लेनदारों को समय से भुगतान करने का आश्वासन दिया। नए ठेकों के अनुबन्ध किए और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में सफल होने लगा। कुछ ही महीनों के कठिन परिश्रम के पश्चात् उसने अपनी हानि को लाभ में परिवर्तित कर दिया। ऐसा करने के दौरान उसने चैक की राशि का उपयोग नहीं किया। चैक अभी तक उसने सम्भाल कर रखा हुआ था। अब उसे व्यापार में इतना लाभ होने लगा था कि उसे चैक की राशि की आवश्यकता नहीं थी।

उसने सोचा क्यों न यह चैक उस व्यक्ति को वापस लौटा दिया जाए जिसने मुसीबत के समय उसे यह चैक दिया था। यह विचार आते ही उसने उस व्यक्ति की तलाश आरम्भ कर दी। बहुत प्रयत्न करने के पश्चात भी प्राण उस अनजान व्यक्ति को नहीं खोज पाया। परंतु उसने निश्चय किया कि वह उस अनजान व्यक्ति, जिसने मुसीबत के समय उसे यह चैक दिया था, की खोज जारी रखेगा और उसका धन ब्याज सहित उसे लौटा देगा। किन्तु चैक को सम्भाल कर रखने का कोई लाभ नहीं था। उसने वह चैक बैंक में जमा कर दिया और फिक्स्ड डिपोसिट खाता खुलवा दिया ताकि चैक की राशि पर ब्याज मिलता रहे। परंतु उस चैक का भुगतान नहीं हो सका और बैंक ने वह चैक प्राण को बैरंग लौटा दिया। बैरंग चैक वापिस लौटने का बैंक ने निम्न कारण बताया : “खाते में पर्याप्त बैलन्स नहीं है। इस खाते के धारक का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है।” यह बात जान कर प्राण को बहुत आश्चर्य हुआ।

जिस चैक के भरोसे उसने लाखों रुपये की सामग्री खरीदी और बेची, जिस चैक के भरोसे उसने बड़े बड़े ठेकों को अंजाम दिया वह मात्र एक काग़ज़ का टुकड़ा निकला। चैक की बहुत बड़ी राशि का होना केवल उसकी कल्पना थी। जो कुछ भी था उस चैक ने प्राण के जीवन में नए प्राण फूंक दिए थे।

उसकी हिम्मत और हौसले को बुलन्द कर दिया था और वह पुन: एक सफल व्यापारी बन गया था। क्या यह कमाल चैक का था? नहीं यह कमाल तो उसके आत्म-विश्वास का था चैक तो उसके खोए हुए विश्वास को जगाने का सहारा बना भले ही वह काल्पनिक था। एक सफल व्यापारी बनने के गुण तो उसमे पहले से ही विद्यमान थे। कठिनाइयों में घिर कर वह अपने उस गुण को कुछ समय के लिऐ भूल गया था। अब उसे अपने आप पर और भी विश्वास होने लगा था।”

Moral- कभी कभी हमारे साथ भी ऐसा ही होता है। हम विपरीत परिस्थितियों में अपना आत्म-विश्वास खो देते हैं। लेकिन सत्य यह है कि हमारे गुण सदैव हमारे साथ रहते हैं। आवश्यकता होती है अपने आत्म-विश्वास और अपनी क्षमता पर भरोसा बनाए रखने की। हमारे गुणों को कोई बाहरी ताक़त हम से छीन नहीं सकती। वह सदैव हमारे पास रहते हैं। यदि मैं गायक हूँ तो गायन की कला को कोई मुझ से छीन नहीं सकता। हाँ, बुरे हालात मेरी इस कला को दबा तो सकते हैं परंतु मुझसे छीन नहीं सकते। मैं जब चाहूँ अपनी कला का प्रयोग कर सकता हूँ। शहद प्राप्त करने के लिए हम मक्खियों का छत्ता तो तोड़ सकते हैं परंतु मक्खी की शहद बनाने की कला उससे नहीं छीन सकते। इसी प्रकार जो कला हमारे पास है, जो गुण हमारे पास हैं वो सदैव हमारे पास ही रहेंगे। शर्त एक ही है हमें अपने आप पर विश्वास रखना होगा।
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Note- This motivational story has been taken from the motivational book Know Your Worth.
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